योजना के बारे में


मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान
मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान
मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान

गांवों में वर्षा का पानी बहकर बाहर जाने की बजाय गांवों के ही निवासियों, पशुओं और खेतों के काम आए, इसी सोच के साथ 27 जनवरी 2016 से ‘मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान’ की शुरुआत की गई। बारिश के पानी की एक-एक बूंद को सहेजकर गांवों को जल आत्मनिर्भरता की ओर बढा़ना इस अभियान का मूल उद्देश्य है।

पहला चरण

अभियान के पहले चरण (27 जनवरी 2016 से 30 जून 2016 तक) में प्रदेश की 295 पंचायत समितियों के 3 हज़ार 529 गांवों का चयन किया गया। अभियान के अन्तर्गत चयनित गांवों में पारंपरिक जल संरक्षण के तरीकों जैसे तालाब, कुंड, बावड़ियों, टांके आदि का मरम्मत कार्य एवं नई तकनीकों से एनिकट, टांके, मेड़बंदी आदि का निर्माण किया गया है। इन जल संरचनाओं के निकट 26.5 लाख से ज़्यादा पौधारोपण भी किया गया है साथ ही इन पौधों का अगले 5 सालों तक संरक्षण भी इस अभियान में शामिल है। इसमें भू-संरक्षण, पंचायतीराज, मनरेगा, कृषि, उद्यान, वन, जलदाय, जल संसाधन एवं भूजल ग्रहण आदि 9 राजकीय विभागों, सामाजिक धार्मिक समूहों एवं आमजन की भागीदारी सुनिश्चित की गई।

मुख्यमंत्री की दूरगामी सोच और बारिश के जल की एक-एक बूंद को सहज कर भूमि में समाहित करने की परिकल्पना अब साकार रूप लेने लगी है। अभियान के पहले चरण में 1270 करोड़ रुपये की लागत से करीब 94 हज़ार निर्माण कार्य पूरे किये गए। अभियान में बनी जल संरचनाओं से लम्बे समय के लिए पानी इकट्ठा हुआ है और गांव जल आत्मनिर्भर बने हैं।

दूसरा चरण

9 दिसम्बर 2016 से शुरू हुए दूसरे चरण में 4 हज़ार 200 नए गांवों का चयन किया गया है। इस चरण में 66 शहरों (प्रत्येक ज़िले से 2) को भी अभियान में शामिल किया गया है। शहरी क्षेत्रों में पूर्व में निर्मित बावड़ियों, तालाबों, जोहडों आदि की मरम्मत का कार्य किया जायेगा। इस चरण में रूफ़ टॉप वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के अलावा परकोलेशन टेंक भी बनाये जायेंगे।

इस चरण में 2100 करोड़ रुपये की लागत से जल संरचनाओं में सुधार कार्य करवाए जाएंगे। इस अभियान के तहत आगामी तीन वर्षों में राज्य के 21 हज़ार गांवों को लाभान्वित कर जल आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य है।

बारिश के पानी को बहने से रोकने से लाभ

  • सतही स्त्रोतों में पानी जमा हुआ
  • भूजल का स्तर बढ़ा
  • पानी के बहाव से मिट्टी की ऊपरी सतह के बहाव को रोका गया, मिट्टी की नमी बढ़ी
  • खेती की पैदावार में बढ़ोतरी हुई

बोल बदलाव के


गणेशपुरा के निवासी

दौसा

मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के तहत जल संरक्षण की कई संरचनाएं बनाई गई हैं। इससे कुंओं के भू-जल स्तर में भी वृद्धि होने से फसल उत्पादन में वृद्धि हुई है।


कुरना के निवासी

पाली

गाँव में लोगों व पशुओं के लिए पीने के पानी की कमी के कारण बहुत परेशान थे, मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के तहत गाँव में नाड़ी का निर्माण करवाया गया। अब खेतों में सिंचाई के लिए पानी और पीने के पानी की कमी नहीं है।



विडियो


मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान-1
मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान-2
मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान-3

टोल फ्री नंबर 1800 180 6127